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मेरे बच्चों के साथ बैठकर फोटो मत निकालना

Posted by Sandeep Shelke on January 15th, 2015

पत्रकार एवम ज्येष्ठ कीर्तनकार हभप शामसुंदर महाराज सोन्नर इनकी लिखी कविता विधानसभा और विधान परिषद भवन में पढ़ी गयी जिसने भवन को दहला दिया। विधानसभा में सिन्नर के विधायक श्री झोरे और विधान परिषद में विधायक श्री जयंत जाधव इन्होने यह कविता पढ़ी। गत कुछ दिनो में संवेदनशील नागरिकोने यह कविता फेसबुक बड़ी मात्रा में शेअर की तभी जाकर यह कविता विधिमंडल में पहुंची।

मूल कविता मराठी में लिखी हैं, और कविताओं का भाषांतर करना बेहद कठिन होता हैं। किन्तु मैं प्रयत्न करता हुँ की कविता का आशय हिंदी भाषाको तक भी पहुंचे, क्यूंकि किसानों की आत्महत्याएं हम सभी के लिए बेहद पीड़ा का कारण हैं।

Borgen magazine

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मिट गया मेरा सुहाग तब भी मुझसे न मिलना।
मेरे बच्चों के साथ बैठकर फोटो मत निकालना।

लाल दिये की गाड़ी में आएगी आपकी सवारी।
कॅमेरे के सामने करोगें शेरो शायरी।

बच्चों के बगल में बैठने से जगह की होगी कमी।
सफ़ेद रुमाल से पोछोगे आँखों की नमी।

झुटमुट की भावनाओं से आँसू मत निकालना।
मेरे बच्चों के साथ बैठकर फोटो मत निकालना।

खेती की सेवा के लिए सुहाग मेरा जिया।
आधे पेट रहकर भी आत्म सम्मान नही खोया।

धरती माँ की गोद भराई का था अर्ज।
फसल तो जल गयी लेकिन बढ़ गया कर्ज।

साहूकार के सितम ने बंद किया घर से निकलना।
मेरे बच्चों के साथ बैठकर फोटो मत निकालना।

फी नहीं बच्चों की पाठशाला के लिए।
मवेशियों को चारा नहीं डालने के लिए।

सुखा कुआं, ट्यूबवेल में नहीं पाणी की बूंद।
जलती फसल को देखते हुई आँखे मूंद।

बेशर्म सरकार के रहते साहूकारों ने बंद न किया लूटना।
मेरे बच्चों के साथ बैठकर फोटो मत निकालना।

उन्होंने रात को की बहोत मीठी मीठी बातें।
उनकी आँख में देख पाणी मन को चुभें काँटे।

आँख खुली सवेरे नहीं दिखे मेरे नाथ।
उन्होंने जान देकर कर दिया हमें अनाथ।

झुटमुट आँखे मूंदकर अब शोक मत करना।
मेरे बच्चों के साथ बैठकर फोटो मत निकालना।

जीते जी उन्हें किसी का सहारा न मिला।
पंचनामा अब हुआ बिना हाथ किये गिला।

कॅमेरे संग अंगनेमें पंहुची सफ़ेद गाड़िया।
इनका हुआ प्रचार मेरी लूट गयी दुनिया।

कहते हैं दुनिया सुधर गयी किन्तु लूट गयी मानवता।
मेरे बच्चों के साथ बैठकर फोटो मत निकालना।

अब होगी पैकेज की घोषणा, धनादेश भी मिलेगा।
क्या इससे मेरे बच्चो का बापू लौट आएगा।

सुहाग लूट गया मेरा किन्तु मैं नहीं हारूंगी।
बच्चो को अनाथ छोड़के मैं नहीं मरूंगी।

परन्तु आप बंद करे यह ढोंग और दोबारा मुझसे मत मिलना।
मेरे बच्चों के साथ बैठकर फोटो मत निकालना।

– पत्रकार एवम ज्येष्ठ कीर्तनकार हभप शामसुंदर महाराज सोन्नर

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